समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आज़म खान को एक मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। रामपुर की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने फैसल लाला की ओर से दायर आपराधिक अपील (क्रिमिनल अपील) को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही ट्रायल कोर्ट द्वारा आज़म खान को बरी किए जाने का फैसला बरकरार रखा गया है।
आज़म खान के अधिवक्ता नासिर सुल्तान ने बताया कि अदालत के इस फैसले के बाद उनके मुवक्किल को इस मामले में राहत मिली है और ट्रायल कोर्ट का निर्णय यथावत रहेगा।
यह मामला 29 मार्च 2019 का है। आरोप था कि आज़म खान ने अपने कार्यालय में चार अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस संबंध में 2 अप्रैल 2019 को रामपुर के कोतवाली थाना में फैसल लाला की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी।
मामले की सुनवाई के बाद 18 दिसंबर 2025 को ट्रायल कोर्ट ने सबूतों के आधार पर आज़म खान को दोषमुक्त (बरी) कर दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए फैसल लाला ने स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट में अपील दायर की थी।
स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसल लाला की अपील खारिज कर दी। अदालत के इस आदेश के साथ ही ट्रायल कोर्ट का बरी करने वाला फैसला प्रभावी बना रहेगा और आज़म खान को इस मामले में कानूनी राहत मिल गई है।
