अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह पहले हुए अंतरिम युद्धविराम समझौते पर अब गंभीर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नई खुफिया जानकारी मिलने के बाद अपना रुख बदलते हुए ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य कार्रवाई तेज करने का फैसला लिया है।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तुर्किये में NATO शिखर सम्मेलन के लिए रवाना होने से पहले व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में हुई एक आपात बैठक में राष्ट्रपति ट्रंप को नई खुफिया जानकारी दी गई। विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बताया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी समुद्री मार्ग से गुजर रहे कई व्यापारिक जहाजों पर एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया। इन हमलों में एक एलएनजी (LNG) टैंकर सहित तीन व्यावसायिक जहाज निशाना बने।
रिपोर्ट के अनुसार, इस जानकारी के बाद ट्रंप ने सवाल उठाया कि क्या ईरान वास्तव में शांति समझौते का पालन करना चाहता है। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने युद्धविराम के तहत दी गई कई रियायतें वापस ले लीं। अमेरिका ने ईरान को तेल निर्यात से जुड़ी राहत समाप्त कर दी और होर्मुज के आसपास ईरानी सैन्य ठिकानों पर हवाई हमलों की मंजूरी दे दी।
व्हाइट हाउस ने चेतावनी दी कि यदि तनाव और बढ़ा तो नागरिक बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया जा सकता है, हालांकि ट्रंप ने कहा कि वे ऐसी स्थिति से बचना चाहते हैं।
तुर्किये में NATO सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कहा कि अब उन्हें नहीं लगता कि यह शांति समझौता बच पाएगा। उन्होंने कहा कि वह फिलहाल ईरान के साथ आगे बातचीत करने के इच्छुक नहीं हैं और आरोप लगाया कि तेहरान समझौते का ईमानदारी से पालन नहीं कर रहा।
ईरान ने अमेरिका के सभी आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि सबसे पहले समझौते का उल्लंघन वॉशिंगटन ने किया। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका ने तेहरान से बिना सहमति लिए होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी समुद्री मार्ग को खोल दिया, जबकि समझौते के तहत जहाजों को उत्तरी मार्ग से गुजरना था। ईरान का दावा है कि उसकी कार्रवाई इसी विवाद का परिणाम थी।
विश्लेषकों के अनुसार, अंतरिम समझौते की सबसे बड़ी कमजोरी यह थी कि इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी किसकी होगी। यही अस्पष्टता अब दोनों देशों के बीच टकराव की बड़ी वजह बन गई है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ताजा घटनाक्रम के बाद अमेरिकी सेना ने होर्मुज के आसपास ईरान के 170 से अधिक सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
दूसरी ओर, ईरान ने जवाबी कार्रवाई में बहरीन, कुवैत, कतर और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ गया है और युद्धविराम का भविष्य अनिश्चित नजर आ रहा है।
