नई दिल्ली/जम्मू: जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर स्थित दुलहस्ती पावर प्रोजेक्ट के गेट खोले जाने के बाद नदी का जलस्तर बढ़ गया है। जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर लोगों से नदी किनारों, जलधाराओं और निचले इलाकों से दूर रहने की अपील की है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि गाद (सिल्ट) निकालने की प्रक्रिया के दौरान पानी का बहाव अचानक तेज हो सकता है।
दुलहस्ती परियोजना को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से ही विवाद बना हुआ है। चिनाब नदी पर प्रस्तावित 260 मेगावाट दुलहस्ती स्टेज-II पनबिजली परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद भी पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि के उल्लंघन का आरोप लगाया था।
पाकिस्तान ने एक बार फिर सिंधु जल संधि को लेकर भारत पर आरोप लगाए हैं। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यदि कोई सिंधु नदी के पानी को नियंत्रित करने की कोशिश करेगा तो उसका जवाब दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि भारत पाकिस्तान की ओर पानी के प्रवाह को रोकने की बात कर रहा है।
इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ भी कह चुके हैं कि यदि देश की जल सुरक्षा को खतरा हुआ तो पाकिस्तान कड़ा कदम उठाएगा।
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से लंबित कई जलविद्युत परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हुई, जिनमें दुलहस्ती स्टेज-II भी शामिल है।
भारत का कहना है कि यह परियोजना पूरी तरह ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ मॉडल पर आधारित है, जिसमें नदी के प्राकृतिक प्रवाह का उपयोग कर बिजली बनाई जाती है और पानी को दोबारा नदी में छोड़ दिया जाता है। सरकार के अनुसार, इसका उद्देश्य ऊर्जा उत्पादन बढ़ाना और क्षेत्र की बिजली जरूरतों को पूरा करना है।
दुलहस्ती स्टेज-II कोई नई स्वतंत्र परियोजना नहीं, बल्कि मौजूदा 390 मेगावाट दुलहस्ती स्टेज-I का विस्तार है। स्टेज-I का संचालन एनएचपीसी (NHPC) द्वारा वर्ष 2007 से किया जा रहा है और यह हर साल 2,000 मिलियन यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन करता है।
इस परियोजना से जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, दिल्ली और चंडीगढ़ सहित उत्तरी ग्रिड के कई राज्यों को बिजली की आपूर्ति होती है।
स्टेज-II के तहत मौजूदा बुनियादी ढांचे का उपयोग करते हुए लगभग 3.7 किलोमीटर लंबी नई सुरंग बनाई जाएगी, जिसके माध्यम से पानी को बिजली उत्पादन के लिए उपयोग किया जाएगा।
दुलहस्ती पावर प्रोजेक्ट के गेट खुलने के बाद प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से नदी के किनारे जाने से बचने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि सिल्ट फ्लशिंग के दौरान जलस्तर और बहाव में अचानक वृद्धि हो सकती है, इसलिए सुरक्षा निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है।
