अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुवार तड़के अमेरिका ने उत्तरी ईरान में कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। साथ ही, नौसैनिक नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहे एक व्यापारी जहाज को भी निष्क्रिय करने का दावा किया। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जबकि जॉर्डन ने अपनी सीमा की ओर बढ़ रही तीन ईरानी मिसाइलों को मार गिराने की जानकारी दी।
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, हालिया अमेरिकी हमलों में 35 से अधिक लोगों की मौत हुई है और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। हालांकि, मृतकों और घायलों में सैनिकों और नागरिकों की संख्या अलग-अलग नहीं बताई गई है।
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, अमेरिका ने सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित 388वीं मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री ब्रिगेड की बैरक को भी निशाना बनाया, जिसमें कम से कम सात सैनिकों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए। वहीं, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया कि उसने रातभर ईरान के कई सैन्य और मिसाइल ठिकानों पर हमले किए।
अमेरिका ने यह भी दावा किया कि ‘बेल्मा’ नाम का एक तेल टैंकर चेतावनी के बावजूद आगे बढ़ रहा था, जिसके बाद हेलफायर मिसाइल से उसे निष्क्रिय कर दिया गया। इसके अलावा, ग्रेटर तुंब द्वीप पर स्थित ईरानी रक्षा प्रतिष्ठानों और मिसाइल ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।
इस बीच अमेरिका ने ईरान पर दोबारा नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ईरान की गतिविधियों से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई, जिससे वैश्विक बाजार में तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ा।
वहीं, ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका अंतरिम समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता, तो ईरान व्यापक सैन्य टकराव के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि बातचीत का मतलब आत्मसमर्पण नहीं होता, बल्कि यह ईरान की रणनीति का हिस्सा है।
अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते सैन्य हमलों ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव को और गहरा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच हालात नहीं सुधरे, तो क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंका और बढ़ सकती है।
