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हिमालय को बचाने का संकल्प: स्पेन की जेमा अपनी पीठ पर ढो रहीं पहाड़ों का कचरा

चमोली/उत्तराखंड। हिमालय की गोद में फैले कचरे को देखकर एक विदेशी युवती का मन ऐसा बदला कि उसने इसे अपना मिशन बना लिया। स्पेन की रहने वाली जेमा कोलेल आज उत्तराखंड के उच्च हिमालयी इलाकों में सफाई की मिसाल बन चुकी हैं। पिछले दो वर्षों से जेमा हिमालय में फैले प्लास्टिक कचरे को अपनी पीठ पर ढोकर नीचे सड़क तक ला रही हैं।

30 वर्षीय जेमा पेशे से स्पेन में ग्राफिक डिजाइनर हैं। वह वर्ष 2023 में योग सीखने और पहाड़ घूमने के उद्देश्य से उत्तराखंड आई थीं। ऋषिकेश में योग सीखने के बाद जब वह हिमालयी क्षेत्रों की ओर निकलीं, तो चमोली जिले के लोहाजंग निवासी पर्वतारोहक मनोज राणा के संपर्क में आईं। पहाड़ों में घूमते समय जब उन्होंने छोटी पगडंडियों से लेकर ऊंची चोटियों तक फैला कूड़ा देखा, तो वह हैरान रह गईं।

यहीं से जेमा ने तय कर लिया कि वह हिमालय को केवल देखने नहीं, बल्कि साफ करने आई हैं। इसके बाद उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में सफाई अभियान शुरू किया। इस अभियान में मनोज राणा भी उनके साथ जुड़ गए। अब तक जेमा और उनकी टीम 300 किलो से अधिक प्लास्टिक कचरा उच्च हिमालय से नीचे ला चुकी है।

लोहाजंग में रहकर जेमा न सिर्फ सफाई कर रही हैं, बल्कि स्थानीय लोगों को जागरूक भी कर रही हैं। वह लोगों को यह समझाने की कोशिश कर रही हैं कि पहाड़ों को साफ रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।

जेमा का कहना है कि हिमालय में कचरा फेंकना बेहद खतरनाक है। यदि समय रहते लोग जागरूक नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ियां हिमालय को असल में नहीं देख पाएंगी, बल्कि यह सिर्फ तस्वीरों तक सीमित रह जाएगा।

जेमा कहती हैं कि उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है, फिर लोग इसे गंदा कैसे कर सकते हैं। उनके अनुसार, स्पेन में लोग अपना कूड़ा अपने साथ लेकर चलते हैं, जबकि यहां यह आदत कम देखने को मिलती है। अगर हर व्यक्ति अपना कूड़ा खुद वापस ले आए, तो पहाड़ अपने आप साफ हो जाएंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जहां एक बार सफाई कर दी जाती है, वहां दोबारा जाने पर फिर कूड़ा फैला हुआ मिल जाता है।

जेमा कोलेल का यह प्रयास न सिर्फ हिमालय के लिए, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।

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