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उत्तराखंड में मोरिंगा और दालचीनी खेती को बढ़ावा, कृषि मंत्री गणेश जोशी ने दिए नवाचार के निर्देश

Ganesh Joshi ने बुधवार को अपने कैंप कार्यालय में कृषि एवं उद्यान विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर राज्य में कृषि और उद्यानिकी क्षेत्र में नवाचार आधारित कार्यों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। बैठक में किसानों की आय बढ़ाने, नई फसलों को प्रोत्साहन देने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के दौरान कृषि मंत्री ने अधिकारियों को प्रदेश में Moringa की संभावनाओं को तलाशने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मोरिंगा स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद लाभकारी फसल है और इसकी मांग देश-विदेश में तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में यह उत्तराखंड के किसानों के लिए आय का बेहतर विकल्प बन सकता है।

बैठक में मौजूद निजी संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि उनकी संस्था असम, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में मोरिंगा उत्पादन और प्रसंस्करण पर काम कर रही है, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बेहतर कार्य करने वाली संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर Dehradun में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में मोरिंगा की खेती और प्रोसेसिंग का कार्य शुरू किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो इसे प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा।

गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड की जलवायु औषधीय और बागवानी फसलों के लिए अनुकूल है। ऐसी फसलों को बढ़ावा देकर किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत की जा सकती है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए।

बैठक में कृषि मंत्री ने 11 और 12 जून को सौगंध पौध केंद्र देहरादून में आयोजित होने वाली दालचीनी खेती, नर्सरी और पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नोलॉजी आधारित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं कार्यशाला की तैयारियों की भी समीक्षा की।

उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला उत्तराखंड में Cinnamon उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

कार्यशाला में Sri Lanka, Indonesia और Vietnam जैसे देशों से विशेषज्ञ और वक्ता शामिल होंगे, जो आधुनिक तकनीक और सफल मॉडल साझा करेंगे। इन बेस्ट प्रैक्टिस को अपनाकर राज्य में दालचीनी उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाने की योजना है।

कृषि मंत्री ने 12 और 13 जून को देहरादून में आयोजित होने वाले Uttarakhand Horticulture Summit and Exhibition 2026 की तैयारियों की भी समीक्षा की।

उन्होंने कहा कि उद्यानिकी क्षेत्र उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ऐसे आयोजनों से किसानों को नई तकनीक, बाजार, निवेश और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिलेगा, जिससे प्रदेश के कृषि और उद्यानिकी क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी।

बैठक में बागवानी मिशन निदेशक महेंद्र पाल, निदेशक कैप नृपेंद्र चौहान, औद्यानिकी बोर्ड के सीईओ नरेंद्र यादव और निजी संस्था के प्रतिनिधि सौरभ रतूड़ी समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।

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