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वैश्विक सप्लाई संकट के बीच चीन पर गंभीर आरोप, पूर्व वर्ल्ड बैंक अध्यक्ष ने उठाए सवाल

David Malpass ने वैश्विक खाद्य और उर्वरक संकट के बीच चीन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि चीन को खाद और अनाज का विशाल भंडार बढ़ाना तुरंत बंद करना चाहिए, क्योंकि इससे दुनिया भर में सप्लाई संकट और गहरा रहा है।

मालपास ने यह बयान BBC World Service के कार्यक्रम “World Business Report” में दिया। उन्होंने कहा कि चीन के पास दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य और उर्वरक भंडार मौजूद है और लगातार स्टॉक बढ़ाने से वैश्विक बाजार पर दबाव बढ़ रहा है।

दरअसल, Iran से जुड़े तनाव और Strait of Hormuz में संकट के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। उर्वरक की खेपों की आवाजाही पर असर पड़ा है, जिससे कई देश कृषि सीजन से पहले आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटे हैं।

इसी बीच चीन ने मार्च से कई प्रकार के उर्वरकों के निर्यात पर रोक लगा दी है। चीन का कहना है कि यह कदम घरेलू जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया है। हालांकि, चीन 2021 से धीरे-धीरे उर्वरक निर्यात पर पाबंदियां बढ़ाता रहा है।

मालपास ने चीन के खुद को “विकासशील देश” बताने पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि China दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और कई मायनों में समृद्ध देश बन चुका है। इसके बावजूद वह अब भी World Trade Organization और World Bank में विकासशील देश का दर्जा बनाए हुए है।

उन्होंने कहा कि अब चीन को इस स्थिति से बाहर आना चाहिए।

वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता Liu Pengyu ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चीन वैश्विक खाद्य और उर्वरक बाजार की स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि सप्लाई चेन में पैदा हुए संकट के “असल कारण” दुनिया जानती है और इसका दोष चीन पर नहीं डाला जा सकता। चीन ने यह भी दोहराया कि वह दुनिया का सबसे बड़ा विकासशील देश है और यह दर्जा बनाए रखना उसका वैध अधिकार है।

मालपास ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर Iran किसी तरह होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण स्थापित करता है या वहां समुद्री मार्ग बाधित होता है, तो इसका बड़ा नुकसान चीन को भी उठाना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि चीन वैश्विक शिपिंग नेटवर्क, कंटेनर व्यापार और खुले समुद्री मार्गों से भारी आर्थिक लाभ कमाता है। ऐसे में समुद्री व्यापार बाधित होने से उसकी अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर पड़ सकता है।

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