जकार्ता। इंडोनेशिया के समुद्री क्षेत्र में हुए नए गैस भंडार की खोज को ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, यहां कई ट्रिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस मौजूद हो सकती है, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक और एशियाई ऊर्जा बाजार की तस्वीर बदलने की क्षमता रखती है।
ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी Eni ने इस खोज की पुष्टि करते हुए कहा कि यह इंडोनेशिया के लिए “गेमचेंजर” साबित हो सकती है। कंपनी के मुताबिक, ड्रिलिंग टेस्ट के दौरान गैस का दबाव और फ्लो उम्मीद से कहीं बेहतर मिला, जिससे बड़े पैमाने पर उत्पादन की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, इस क्षेत्र से प्रतिदिन करोड़ों स्टैंडर्ड क्यूबिक फीट गैस का उत्पादन संभव हो सकता है। इसके अलावा हजारों बैरल कंडेनसेट उत्पादन की भी संभावना जताई गई है।
बताया जा रहा है कि यह गैस भंडार समुद्र की सतह से करीब 2000 मीटर नीचे मिला है। इतनी गहराई में सफल ड्रिलिंग तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि इंडोनेशिया की तकनीकी क्षमता और ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस खोज से दक्षिण-पूर्व एशिया में गैस आपूर्ति मजबूत होगी और कई देशों की आयात पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा को भी बड़ा सहारा मिलेगा।
इस गैस परियोजना का असर भारत पर भी पड़ सकता है। यदि इंडोनेशिया में बड़े स्तर पर गैस उत्पादन शुरू होता है, तो एशिया में गैस की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे वैश्विक LNG बाजार में दबाव कम हो सकता है और भारत को भविष्य में अपेक्षाकृत स्थिर कीमतों पर गैस आयात करने में मदद मिल सकती है।
कंपनी अब इस परियोजना की विकास योजना तैयार कर रही है और जल्द ही इसे इंडोनेशिया सरकार को मंजूरी के लिए सौंप सकती है। यदि परियोजना को स्वीकृति मिलती है, तो आने वाले कुछ वर्षों में यहां बड़े पैमाने पर गैस उत्पादन शुरू होने की संभावना है।

