
मलयालम सिनेमा के सुपरस्टार ममूटी अपनी शानदार अदाकारी के साथ-साथ अपनी दिलचस्प शख्सियत के लिए भी जाने जाते हैं। उनसे जुड़े पुराने किस्से अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। अब अभिनेता और लेखक वीके श्रीरामन ने ममूटी से जुड़ा करीब 40 साल पुराना एक ऐसा अनुभव साझा किया है, जिसे सुनकर लोग हैरान हैं। इस घटना में ममूटी की कार से एक 10 साल का बच्चा टकरा गया था, लेकिन उसकी जान चमत्कारिक रूप से बच गई। श्रीरामन उस समय कार में ममूटी के साथ मौजूद थे और उन्होंने सोशल मीडिया पर इस पूरे घटनाक्रम को याद किया है।
वीके श्रीरामन के मुताबिक, यह घटना निर्देशक पवित्रन की फिल्म ‘उत्तरम’ की शूटिंग के दौरान हुई थी। उस समय फिल्म की शूटिंग ऊटी में चल रही थी। ममूटी और श्रीरामन उनकी मशहूर 369 नंबर वाली कॉन्टेसा कार में सवार होकर ऊटी से कोयंबटूर जा रहे थे। कार खुद ममूटी चला रहे थे।
रास्ते में एक कॉन्वेंट स्कूल के सामने अचानक 10 साल का एक बच्चा सड़क पार करके बस में चढ़ने के लिए दौड़ा। इसी दौरान बच्चा ममूटी की कार से टकरा गया। ममूटी ने तुरंत ब्रेक लगाया। अचानक ब्रेक लगने से आगे की सीट पर बैठे श्रीरामन भी कार के शीशे से टकरा गए। हादसे के बाद दोनों तुरंत कार से बाहर निकले।
श्रीरामन ने बताया कि हादसे के बाद उन्हें लगा कि स्थानीय लोग गुस्से में आकर उनके साथ मारपीट कर सकते हैं या कार को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लेकिन जब वे घटनास्थल पर पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर हैरान रह गए।
बच्चा सड़क किनारे बनी नाली की तरफ जा गिरा था। कुछ लोग उसे उठाकर उनकी ओर ला रहे थे, लेकिन बच्चा बिल्कुल ठीक था और मुस्कुरा रहा था। स्कूल के सिक्योरिटी चीफ ने बताया कि कार की टक्कर बच्चे की दाईं जांघ पर लगी थी। संयोग से उसकी पैंट की उसी जेब में दो क्रिकेट बॉल रखी हुई थीं। माना गया कि गेंदों की वजह से टक्कर का असर कम हुआ। इसके अलावा बच्चा सड़क किनारे मौजूद बेलों और झाड़ियों पर गिरा, जिससे उसे गंभीर चोट नहीं आई।
सिक्योरिटी चीफ ने इस घटना को किसी फिल्म के स्टंट सीन जैसा बताया और ममूटी की ओर हाथ बढ़ाकर उन्हें असली हीरो कहा। ममूटी ने भी मुस्कुराते हुए उनसे हाथ मिलाया।
हादसे के बाद जब दोनों दोबारा कार में बैठे तो ममूटी ने श्रीरामन से पूछा कि क्या वह डर गए थे। इस पर श्रीरामन ने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया कि उन्हें डर था कि कहीं स्थानीय लोग ममूटी को छोड़कर उन्हें ही ड्राइवर न समझ लें।
उन्होंने बताया कि उन्हें चिंता थी कि लोग उनसे सवाल करेंगे कि स्कूल के पास बच्चों की मौजूदगी के बावजूद इतनी तेज गाड़ी क्यों चला रहे थे। इस पर ममूटी ने भी हाजिरजवाबी दिखाते हुए कहा कि उनके कपड़ों में श्रीरामन बिल्कुल ड्राइवर जैसे लग रहे थे।
श्रीरामन ने यह भी बताया कि कोयंबटूर पहुंचने तक वह बार-बार पीछे मुड़कर देखते रहे कि कहीं हादसे में घायल बच्चा और उसके साथ आए लोग उनका पीछा तो नहीं कर रहे हैं।
वीके श्रीरामन की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। उन्होंने करीब चार दशक पुरानी इस घटना को जिस सहज और मजाकिया अंदाज में याद किया है, वह लोगों को पसंद आ रहा है। ममूटी और श्रीरामन के बीच की दोस्ती से जुड़ा यह किस्सा एक अप्रत्याशित हादसे के बाद मिले राहत भरे पल को बयां करता है।

