onwin giriş
Home उत्तराखंड

बर्थ सर्टिफिकेट में देरी पड़ेगी भारी, नए नियमों से होगी सख्ती

जन्म प्रमाणपत्र (बर्थ सर्टिफिकेट) अब बच्चों के लिए सबसे अहम दस्तावेज बन चुका है। ऐसे में समय पर इसे बनवाना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है। केंद्र सरकार जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था को और सख्त बनाने की तैयारी में है। वहीं, उत्तराखंड में जन्म प्रमाणपत्र जारी होने की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

वर्तमान नियमों के अनुसार, बच्चे के जन्म के 21 दिनों के भीतर जन्म प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया सबसे आसान और निशुल्क है। हालांकि, सरकार द्वारा लाए गए जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 के लागू होने के बाद देरी से जन्म प्रमाणपत्र बनवाना और कठिन हो जाएगा।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत:

1 से 2 साल की देरी होने पर जिला मजिस्ट्रेट (DM), एसडीएम या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति जरूरी होगी।
2 साल से अधिक देरी होने पर प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही जन्म प्रमाणपत्र जारी किया जा सकेगा।

सरकार का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और फर्जी दस्तावेजों से मुक्त बनाना है।

2023 के बाद बढ़ा जन्म प्रमाणपत्र का महत्व

केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2023 में किए गए संशोधन के बाद 1 अक्टूबर 2023 से जन्म प्रमाणपत्र उम्र का प्रमुख आधिकारिक दस्तावेज बन गया है। इसके आधार पर आधार कार्ड, स्कूल में प्रवेश और कई अन्य सरकारी सेवाओं का लाभ लिया जाता है।

उत्तराखंड में भी जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अब सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) के माध्यम से ऑनलाइन किया जा रहा है।

उत्तराखंड में बढ़े जन्म प्रमाणपत्र

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार:

2023-24 में 1.51 लाख जन्म के मुकाबले 2.27 लाख जन्म प्रमाणपत्र जारी हुए।
2024-25 में 1.47 लाख जन्म के मुकाबले 2.77 लाख प्रमाणपत्र जारी किए गए।
2025-26 में 1.53 लाख जन्म के मुकाबले 2.81 लाख जन्म प्रमाणपत्र जारी हुए।

इससे साफ है कि ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद अधिक लोग पुराने लंबित मामलों का भी पंजीकरण करा रहे हैं।

अस्पतालों में क्यों होती है देरी?

उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में कई बार तकनीकी समस्याओं, कार्यभार अधिक होने या अभिभावकों द्वारा समय पर बच्चे का नाम तय न कर पाने के कारण जन्म प्रमाणपत्र जारी होने में देरी होती है।

हालांकि, नियमों के अनुसार बिना नाम के भी जन्म प्रमाणपत्र जारी किया जा सकता है, जिसे बाद में निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपडेट कराया जा सकता है।

देरी पर वर्तमान शुल्क और प्रक्रिया
21 दिन तक: निशुल्क।
21 से 30 दिन: ₹20 विलंब शुल्क।
30 दिन से 1 वर्ष: तहसीलदार/ईओ की अनुमति और ₹50 शुल्क।
1 वर्ष से अधिक: एसडीएम की अनुमति और ₹100 विलंब शुल्क।
नाम अपडेट करने के नियम

यदि जन्म प्रमाणपत्र बिना नाम के जारी हुआ है, तो:

एक वर्ष के भीतर माता-पिता के आवेदन पर नाम जोड़ा जा सकता है।
एक से 15 वर्ष के बीच नाम जोड़ने के लिए आवेदन के साथ शपथपत्र (एफिडेविट) और संबंधित दस्तावेज देना होगा।
15 वर्ष के बाद जन्म प्रमाणपत्र में नाम जोड़ने की सामान्य व्यवस्था नहीं है।

स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चे के जन्म के तुरंत बाद आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराकर समय पर जन्म प्रमाणपत्र बनवाएं, ताकि भविष्य में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

Similar Posts

© www.surkandasamachar.com· All Rights Reserved.