बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपना पांच वर्षीय कार्यकाल पूरा होने से लगभग दो वर्ष पहले ही पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए अपना इस्तीफा संसद के स्पीकर मेजर (सेवानिवृत्त) हाफिज़ उद्दीन अहमद को सौंप दिया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शहाबुद्दीन लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों से जूझ रहे थे।
हालांकि, उनके इस्तीफे को केवल स्वास्थ्य कारणों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, हाल के दिनों में उनकी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से कथित निकटता और संपर्क की कोशिशों को लेकर सरकार के भीतर असहजता बढ़ गई थी। यह इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब शेख हसीना ने घोषणा की है कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटकर अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगी।
मोहम्मद शहाबुद्दीन, जो 2023 में निर्विरोध राष्ट्रपति चुने गए थे, अवामी लीग से जुड़े रहे हैं और उन्हें शेख हसीना का करीबी सहयोगी माना जाता रहा है। 2024 के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद भी वे उस सरकार से जुड़े अंतिम प्रमुख संवैधानिक पदाधिकारी थे, जो अपने पद पर बने हुए थे। उनके इस्तीफे को बांग्लादेश की मौजूदा राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
बांग्लादेश के संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति पद रिक्त होने की स्थिति में संसद के स्पीकर हाफिज़ उद्दीन अहमद नए राष्ट्रपति के निर्वाचन तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे। संविधान का अनुच्छेद 54 इस व्यवस्था का प्रावधान करता है।
इस बीच, शेख हसीना के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई चर्चा में है। पिछले वर्ष बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई कार्रवाई से जुड़े मामले में उन्हें और तत्कालीन गृह मंत्री असदुज्ज़मान खान कमाल को अनुपस्थिति में मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। शेख हसीना ने इन आरोपों से इनकार किया है।
शहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद बांग्लादेश की राजनीति में नए राष्ट्रपति के चुनाव और आगामी राजनीतिक घटनाक्रम पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
