नई दिल्ली। वेदांता समूह के चेयरमैन और अरबपति उद्योगपति अनिल अग्रवाल ने इंडिया टीवी के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘आप की अदालत’ में अपने जीवन और कारोबारी सफर से जुड़े कई अनसुने किस्से साझा किए। उन्होंने बताया कि पटना के एक स्क्रैप कारोबारी से लेकर दुनिया के प्रमुख उद्योगपतियों में शामिल होने तक का उनका सफर आसान नहीं था। अनिल अग्रवाल के मुताबिक, कारोबार में आगे बढ़ने के लिए अच्छी प्रेजेंटेशन, सही टाइमिंग और जोखिम उठाने की क्षमता बेहद जरूरी है।
भारत के संसाधनों और युवाओं पर भरोसा
अनिल अग्रवाल ने कहा कि वह ऐसा भारत देखना चाहते हैं, जहां हर युवा के पास अपनी पसंद की नौकरी चुनने का विकल्प हो। उन्होंने देश में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों का सही तरीके से इस्तेमाल करने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि भारत में तेल, गैस, तांबा और सोने जैसे प्राकृतिक संसाधनों की कमी नहीं है। उनका मानना है कि आने वाले समय में भारत के ह्यूमन रिसोर्स और नेचुरल रिसोर्स देश की आर्थिक ताकत को और बढ़ा सकते हैं। उन्होंने विदेशों में भारतीयों की सफलता का भी जिक्र करते हुए कहा कि भारतीयों ने दुनिया में अपनी पहचान बनाई है।
सेमीकंडक्टर योजना से क्यों पीछे हटे?
सेमीकंडक्टर कारोबार को लेकर अनिल अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने अपनी कोर कॉम्पिटेंस पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि ऑयल, गैस, एल्युमिनियम, जिंक और कॉपर जैसे क्षेत्रों में उनका अनुभव अधिक है, इसलिए इन्हीं क्षेत्रों को मुख्य फोकस में रखना उचित लगा।
उन्होंने यह भी बताया कि परिवार से जुड़ी परिस्थितियों के कारण सेमीकंडक्टर क्षेत्र में जाने की शुरुआत हुई थी। उनकी बेटी की शादी मैंगलोर के एक इंजीनियर से हुई, जो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम करते हैं। इसी वजह से परिवार का इस क्षेत्र में रुचि बढ़ी थी। हालांकि बाद में उन्होंने महसूस किया कि कंपनी के मुख्य कारोबार पर ध्यान देना ज्यादा बेहतर रहेगा।
550 करोड़ में BALCO खरीदने का किस्सा
अनिल अग्रवाल ने भारत एल्युमिनियम कंपनी (BALCO) के अधिग्रहण से जुड़ा दिलचस्प किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय उनकी कंपनी स्टरलाइट ने BALCO को करीब 550 करोड़ रुपये में खरीदा था।
अग्रवाल के मुताबिक, उस समय कंपनी के बैंक खाते में महज करीब 5 करोड़ रुपये थे। इसके बावजूद उन्होंने बैंकों से संपर्क किया और BALCO खरीदने के लिए वित्तीय मदद मांगी। उन्होंने बताया कि 550 करोड़ रुपये की जरूरत के मुकाबले उन्हें बैंकों से करीब 2,000 करोड़ रुपये तक के कर्ज की पेशकश मिली थी।
उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और अरुण जेटली से मुलाकात का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, वाजपेयी ने उनसे कर्मचारियों को नौकरी से नहीं हटाने की बात कही थी। अग्रवाल ने जवाब दिया था कि कर्मचारियों की संख्या घटाने के बजाय वे इसे कई गुना बढ़ाने का प्रयास करेंगे।
बिहार में फैक्ट्री और स्टेडियम का प्लान
बिहार के विकास को लेकर भी अनिल अग्रवाल ने अपनी योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने राज्य में फैक्ट्री लगाने के किसी प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करने की बात कही। साथ ही बिहार में एक स्टेडियम बनाने की इच्छा भी जताई।
उन्होंने बिहार से आने वाले क्रिकेट खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य में प्रतिभा की कमी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि IPL में बिहार की अपनी टीम होनी चाहिए।
लंदन में ‘महाराजा अनिल कुमार’ बनकर बनाई पहचान
अनिल अग्रवाल ने लंदन में अपने शुरुआती दिनों का एक बेहद दिलचस्प किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि भारत में कारोबार करने के बाद जब वह लंदन पहुंचे तो वहां के कारोबारी और अमीर लोगों के बीच उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिलता था। इससे उन्हें हीन भावना महसूस होने लगी।
इसके बाद उन्होंने खुद को अलग तरीके से प्रस्तुत करने का फैसला किया। उन्होंने अपने लिए ‘महाराजा अनिल कुमार’ नाम का कार्ड बनवाया और पत्नी तथा बच्चों के साथ सामाजिक आयोजनों में जाना शुरू किया। अग्रवाल के मुताबिक, लंदन में ‘महाराजा’ शब्द सुनकर लोगों का रवैया काफी अलग हो जाता था।
उन्होंने बताया कि उन्हें अपनी पहचान बनाने में करीब दो साल लगे। इसी दौरान उनकी भारतीय कंपनी का कारोबार करीब 300 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। बाद में कंपनी को लंदन में करीब 4,000 करोड़ रुपये के मूल्यांकन पर सूचीबद्ध कराने की दिशा में कदम बढ़ाया गया।
‘कहानी बनाना जरूरी है, लेकिन झूठ मत बोलिए’
अपने कारोबारी सफर से सीख साझा करते हुए अनिल अग्रवाल ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की सफलता में उसकी कहानी और खुद को प्रस्तुत करने का तरीका महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उनका संदेश था कि आगे बढ़ने के लिए अपनी कहानी बनाना जरूरी है, लेकिन उसमें झूठ नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कारोबार में सही समय पर सही फैसला, जोखिम लेने का साहस और अपनी क्षमता को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करना सफलता के लिए महत्वपूर्ण है। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि वेदांता समूह आने वाले लंबे समय तक देश की आर्थिक यात्रा में योगदान देता रहेगा।

