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रियाद एयरपोर्ट पर फिर हमला, उड़ानें बंद; हूतियों की धमकी से खाड़ी क्षेत्र में बढ़ा तनाव

सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रविवार को एक बार फिर हमला हुआ। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक, एयरपोर्ट के यात्री टर्मिनल पर एक प्रोजेक्टाइल आकर गिरा। इससे पहले शनिवार को हुए हमले में 13 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 300 लोग घायल हुए थे। ताजा हमले में भी लोगों के घायल होने की खबर है। लगातार हमलों के कारण एयरपोर्ट का संचालन प्रभावित है और कई एयरलाइंस ने अपनी उड़ानें रोक दी हैं। यमन के हूती विद्रोहियों ने दोनों हमलों की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है।

ट्रंप सऊदी क्राउन प्रिंस से करेंगे बातचीत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बातचीत करेंगे। इस बीच, सऊदी अरब कथित तौर पर अपनी मिसाइल रक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए दूसरे देशों से मदद मांग रहा है।

रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी अरब ने मिसाइलों को हवा में रोकने वाली रक्षा प्रणालियों के लिए फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र से सहायता मांगी है। लगातार हमलों के कारण उसकी रक्षा क्षमताओं पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

यदि अमेरिका हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में शामिल होता है, तो संघर्ष और व्यापक हो सकता है। इसका असर लाल सागर से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर भी पड़ सकता है।

एयरपोर्ट और तेल-गैस ठिकानों पर हमले का दावा

हूती विद्रोहियों ने रविवार को दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब के दम्माम स्थित किंग फहद एयरपोर्ट और देश के पूर्वी हिस्से में तेल एवं गैस से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बनाया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

हूतियों ने एयरलाइंस, कर्मचारियों और यात्रियों को सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र तथा एयरपोर्ट का इस्तेमाल करने से बचने की चेतावनी भी दी है। उन्होंने मक्का और मदीना के एयरपोर्ट को हमलों से अलग रखने की बात कही है।

हमलों के खतरे के बीच कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने अपनी उड़ानों में बदलाव किया है या सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी हैं।

तेल की कीमतों पर पड़ सकता है असर

सऊदी अरब पर लगातार हो रहे हमलों से वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है। लाल सागर के दक्षिणी हिस्से में स्थित बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होने पर तेल और अन्य वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

सऊदी अरब के तेल ठिकानों और परिवहन नेटवर्क को नुकसान पहुंचने की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, कीमतों पर वास्तविक असर हमलों की अवधि, नुकसान और आपूर्ति में आने वाली बाधाओं पर निर्भर करेगा।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सम्मेलन के बीच हमला

रियाद में रविवार को एक अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सम्मेलन आयोजित किया जा रहा था। आने वाले दिनों में यहां निवेश से जुड़ा एक बड़ा कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। सऊदी अरब पर्यटन और निवेश को बढ़ावा देने के प्रयास कर रहा है, लेकिन लगातार हमलों से इन गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका है।

सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने कहा कि उनका देश मुश्किल परिस्थितियों से उबरने में सक्षम है। उन्होंने तेल की आपूर्ति जारी रखने के लिए नई पाइपलाइन पर काम किए जाने की भी जानकारी दी। उनके मुताबिक, पिछले महीने एक पाइपलाइन पर हमले के बाद उसे कई दिनों तक बंद रखना पड़ा था।

यमन में भी लोगों की मौत का दावा

हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले यमन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया कि रविवार को सना में एक घर पर हुए संदिग्ध हवाई हमले में एक बच्चे की मौत हो गई और छह लोग घायल हुए। मंत्रालय के अनुसार, पिछले पांच सप्ताह में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के हमलों में यमन में 91 लोगों की मौत हुई है। इनमें बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की बताई गई है।

इन आंकड़ों और हमले के जिम्मेदार पक्ष को लेकर स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध होना जरूरी है। खबर के मुताबिक, इस मामले पर सऊदी अधिकारियों की तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

सऊदी अरब वर्ष 2015 में यमन के संघर्ष में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में शामिल हुआ था। वर्ष 2022 में संघर्षविराम के बाद कुछ समय तक तनाव में कमी आई, लेकिन बाद में हालात फिर बिगड़ने लगे।

मृतकों में कई देशों के नागरिक शामिल

सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार के हमले में मारे गए लोगों में चार सऊदी नागरिक, दो बांग्लादेशी नागरिक और अमेरिका, मिस्र, फिलिस्तीन, जॉर्डन, सीरिया तथा सूडान के एक-एक नागरिक शामिल थे।

मृतकों में मिस्र की फ्लाइट अटेंडेंट अज़्ज़ा रमज़ी भी थीं, जो सऊदी एयरलाइन फ्लाइनास में काम करती थीं। सीरिया की बुथैना अहमद ओवैदा की भी हमले में मौत हो गई। बताया गया है कि वह चार बच्चों की मां थीं और पिछले पांच वर्षों से सऊदी अरब में रह रही थीं।

हूतियों के हमलों से बढ़ सकता है संघर्ष

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के यमन मामलों के वरिष्ठ विश्लेषक अहमद नागी के मुताबिक, सऊदी अरब के एयरपोर्ट और तेल ठिकानों को निशाना बनाने से हूतियों के खिलाफ सऊदी सैन्य कार्रवाई तेज हो सकती है।

लगातार हमलों, उड़ानों पर रोक और तेल ठिकानों को लेकर सामने आ रहे दावों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यदि सैन्य कार्रवाई का दायरा बढ़ता है, तो इसका असर खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता, अंतरराष्ट्रीय विमानन और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।

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