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नरवणे बोले- चीन सीमा विवाद का सैन्य समाधान संभव नहीं

पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने कहा है कि चीन के साथ सीमा विवाद का सैन्य समाधान संभव नहीं है। उन्होंने गलवान घाटी में 2020 में हुई झड़प का जिक्र करते हुए कहा कि सीमा को लेकर जिन इलाकों में दोनों देशों के बीच असहमति है, वहां आगे भी टकराव की स्थिति बन सकती है। नरवणे के मुताबिक, इस विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीतिक प्रयास जरूरी हैं।

उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा का मुद्दा अभी पूरी तरह हल नहीं हुआ है। दोनों देशों की वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को लेकर अलग-अलग समझ है, जिसके कारण कई क्षेत्रों में विवाद पैदा होता है। नरवणे ने स्पष्ट किया कि सीमा में एकतरफा बदलाव के लिए बल प्रयोग स्वीकार्य नहीं है।

गलवान के बाद बदले हालात

जनरल नरवणे ने कहा कि गलवान झड़प के बाद की घटनाओं ने यह स्पष्ट किया कि सैन्य कार्रवाई के जरिए सीमा विवाद का स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सकता। उन्होंने दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच बातचीत को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि संवाद के माध्यम से विवाद सुलझाने के प्रयासों को गति मिली है।

उन्होंने यह भी कहा कि गलवान की घटना के बाद भारत ने सैन्य, राजनयिक और राजनीतिक स्तर पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्थिति मजबूत की है।

भारत-चीन संबंधों में सुधार की कोशिश

जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के संबंधों में तनाव बढ़ गया था। पूर्वी लद्दाख में लंबे समय तक सैन्य गतिरोध बना रहा और दोनों देशों ने सीमा पर सैनिकों की तैनाती बढ़ाई।

अक्टूबर 2024 में दोनों देश डेपसांग और डेमचोक क्षेत्रों में गश्त की व्यवस्था को लेकर सहमत हुए। इससे सीमा पर तनाव कम करने और सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिली। हालांकि, व्यापक सीमा विवाद अब भी कायम है।

भारत और चीन के बीच संबंध सुधारने के लिए सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत जारी है। नरवणे के बयान के मुताबिक, सीमा विवाद के स्थायी समाधान के लिए संवाद और आपसी सहमति की भूमिका अहम बनी रहेगी।

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