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अरुणाचल प्रदेश में चीनी अतिक्रमण के आरोप, सामुदायिक संगठन ने जांच की मांग की

ईटानगर। अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले के ताक्सिंग क्षेत्र के एक सामुदायिक संगठन ने भारत-चीन सीमा क्षेत्र में चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) द्वारा कथित अतिक्रमण और निर्माण गतिविधियों की जांच कराने की मांग उठाई है।

नाह वेलफेयर सोसाइटी (NWS) ने अपर सुबनसिरी जिले के डिप्टी कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि चीनी सेना ने भारतीय क्षेत्र के भीतर सड़कें, पुल और सैन्य शिविरों का निर्माण किया है। संगठन का दावा है कि पिछले एक दशक के दौरान हुए इन निर्माण कार्यों से स्थानीय समुदायों की पारंपरिक चरागाह भूमि, शिकार क्षेत्र और पुश्तैनी भूभाग प्रभावित हुए हैं।

ज्ञापन में ओयिंग (असाफिला क्षेत्र), पनियार (चुजार्ता क्षेत्र), मारपन (मार्नाफे), पोत्रांग झील और टिंडिंगटांग (TG) को उन स्थानों के रूप में चिन्हित किया गया है, जहां कथित रूप से चीनी सेना द्वारा बुनियादी ढांचे का विकास किया गया है।

नाह वेलफेयर सोसाइटी ने जिला प्रशासन से अनुरोध किया है कि मामले को उचित कार्रवाई के लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाए। संगठन ने सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के हितों की रक्षा करने तथा उनकी पारंपरिक एवं पुश्तैनी भूमि को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने की भी मांग की है।

सोसाइटी के अध्यक्ष केरू चदर द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन के साथ कुछ तस्वीरें भी संलग्न की गई हैं। संगठन का दावा है कि ये तस्वीरें उसके आरोपों का समर्थन करती हैं और सीमा क्षेत्र में कथित निर्माण गतिविधियों को दर्शाती हैं।

हालांकि, समाचार लिखे जाने तक जिला प्रशासन, अरुणाचल प्रदेश सरकार, भारतीय सेना अथवा रक्षा मंत्रालय की ओर से इन आरोपों की पुष्टि या खंडन करते हुए कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी शेष है।

मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता व्यक्त की जा रही है और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों ने सरकार से स्थिति स्पष्ट करने तथा आवश्यक जांच कराने की मांग की है।

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