उत्तराखंड नहीं भुला पाएगा सुषमा स्वराज के जाने का गम

देहरादून में सुषमा स्वराज ने दूरदर्शन केंद्र के शुभारंभ कार्यक्रम में कहा था कि उत्तरांचल मेरा नया घर है। इसे अटल जी ने अभी-अभी बनाया है। सुषमा स्वराज ने ऋषिकेश में भी एम्स का शिलान्यास अपने हाथों से ही किया था । उत्तराखंड से सुषमा स्वराज का गहरा रिश्ता रहा है। उन्होंने अलग राज्य बनने के बाद उत्तराखंड की नुमाइंदगी बतौर राज्यसभा सदस्य (सांसद) के रूप में संसद के उच्च सदन में की थी। सुषमा स्वराज ने उत्तराखंड में भाजपा की स्टार प्रचारक के तौर पर कई दौरे किए। उनमें महिलाओं ने एक सशक्त महिला की छवि देखी।

जब उत्तराखंड में पहले विधानसभा चुनाव हुए तो वह राज्य के सभी प्रमुख स्थानों पर चुनाव प्रचार के लिए पहुंचीं थीं। इसकी एक वजह यह भी थी कि वह तब उत्तराखंड से राज्यसभा की सदस्य थीं। सुषमा स्वराज वर्ष 2000 में उत्तर प्रदेश से सांसद चुनकर राज्यसभा पहुंची थीं। इस बीच नौ नवंबर 2000 को अलग उत्तराखंड राज्य बन गया। सुषमा स्वराज की राज्यसभा सीट उत्तराखंड के लिए आवंटित हो गई। इसके बाद से 2006 तक उन्होंने उत्तराखंड का राज्यसभा में प्रतिनिधित्व किया। अपने इस कार्यकाल के दौरान सुषमा ने राज्यसभा में कई बार उत्तराखंड के मुद्दों को आवाज भी दी। राज्य के मुद्दे जोरदार तरीके से उठाने की वजह से सुषमा स्वराज उत्तराखंड के जनमानस के दिलों पर राज करती रहेंगी।

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