उत्तराखंड में सीएम और शिक्षा मंत्री में फीस एक्ट को लेकर अनबन

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के बीच निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने को फीस एक्ट को लेकर के अनबन हैं। मंत्री के निर्देश के बावजूद शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम की ओर से फीस एक्ट के लिए जिलाधिकारियों को गाइडलाइन नहीं भेजने के पीछे उच्च स्तर से पड़े दबाव को वजह माना जा रहा है। जिलाधिकारियों से फीस एक्ट पर सुझाव लेने के लिए बीती 17 जुलाई को सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम को विधानसभा बुलाकर निर्देश दिए थे। 

शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने विधानसभा में मीडिया से बातचीत में कहा कि सचिव ने निर्देशों के बावजूद जिलाधिकारियों को फीस एक्ट पर सुझाव लेने के लिए गाइडलाइन नहीं भेजी। उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने की वजह से वह बीते माह अप्रैल में नए शिक्षा सत्र के दौरान दिशा-निर्देश नहीं दे पाए। इस वजह से निजी स्कूलों ने हर स्तर पर मनमानी बरती। इससे अभिभावकों में अभी तक असंतोष है। एनसीईआरटी की किताबों के साथ ही निजी स्कूलों ने मनमाने तरीके से अन्य किताबें भी लेने को छात्रों को विवश किया। इससे अभिभावकों और छात्रों का उत्पीड़न हुआ। 

इससे खफा शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने सचिव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने कहा कि आदेशों की नाफरमानी को लेकर वह सचिव की शिकायत सीएम से करेंगे। यही नहीं दुर्गम से सुगम में शिक्षकों के तबादलों पर लगी रोक से भावुक हुए अरविंद पांडे ने कहा कि वह शिक्षा मंत्री रहे तो शिक्षकों को न्याय जरूर दिलाएंगे। 

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