अफसरशाही की नब्ज समझते हैं योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ, नाथ सम्प्रदाय की प्रतिष्ठित पीठ- गोरक्षनाथ पीठ के पीठाधीश्वर तो हैं ही साथ ही प्रशासन और राजनीति के भी अधीश्वर हैं। वे पांच बार सांसद रहे हैं और अब उत्तर प्रदेश जैसे राज्य के मुख्यमंत्री का दायित्व निभा रहे हैं।

उन्होंने 2017 में कड़ी प्रति द्वन्दिता में सी एम की कुर्सी पायी थी। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव मंे भी प्रदेश से भाजपा को 62 सांसद मिले हैं। दो सांसद सहयोगी दलों को मिले। इस प्रकार श्री योगी का रिकार्ड अभी टाॅप पर है। उन्होंने लोकसभा चुनाव के बाद प्रदेश के पुलिस और प्रशासन के अफसरों की बैठक बुलाकर जिस तरह से निर्देश दिये हैं, उससे पता चलता है कि अफसरशाही की नब्ज भी वे पहचानते हैं।

श्री योगी ने अफसरों से कहा कि कानून-व्यवस्था से समझौता नहीं होगा। उन्होंने यह भी कह दिया कि 20 जून से मंडलवार दौरा करके देखेंगे कि उनके निर्देश पर कितना अमल हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में सबसे ज्यादा शिकायत लेखपालों से रहती है। अब लेखपालों को भी लैपटाप दिये जाएंगे। इसकी शुरुआत 16 जून को होगी। अफसरों ने भी समझ लिया कि मुख्यमंत्री योगी से दांए-बांए नहीं चल पाएगा।

इसका एक ही उदाहरण काफी हैं मुख्यमंत्री ने अफसरों से कहा कि करोड़ों लोग कुंभ के अवसर पर प्रयागराज संगम में स्नान करके चले गये लेकिन कहीं भी गंदगी नहीं दिखाई पड़ी लेकिन आज गांवों में चले जाइए, वहां नालियां गंदगी से पटी मिलेंगी। सफाईकर्मी भी गांवों में तैनात हैं लेकिन वे क्या कर रहे, इस पर जिलाधिकारी कभी सोचते ही नहीं हैं। गांवों की यह स्थिति है तो कस्बों और शहरों की हालत का भी अनुमान लगा लीजिए। चार दिन बाद बारिश शुरू हो जाएगी, तब कहेंगे नालियां भरी हैं, पानी नहीं निकल रहा..।

मुख्यमंत्री ने कहा कि काम ऐसा हो कि हमें जोर से बोलने की जरूरत ही न पड़े। मुख्यमंत्री सख्ती से पेश आएंगे, इसका आभास उसी समय हो गया था जब
अधिकारियों के मोबाइल फोन सभा कक्ष में जाने से पहले ही रखवा लिये गये। बैठक मंे समय का पालन भी सख्ती के साथ किया गया। मुख्यमंत्री की बैठक लोकभवन में ठीक पूर्वाह्न 11 बजे शुरू हुई। सवा 11 बजे तक तो अधिकारियों को प्रवेश का अवसर दिया गया लेकिन 15 मिनट बाद ही गेट बंद हो गये। कई बड़े अधिकारी बाहर से ही लौटा दिये गये। मुख्यमंत्री की यह पहली संयुक्त बैठक थी जिसमें शासन स्तर पर विशेष सचिव और एसपी स्तर के अधिकारी भी बुलाये गये थे। मुख्यमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत गंगा दशहरा की बधाई से की। इसके बाद सीधे कहा कि कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने हालांकि यह संकेत भी दिया कि वे अपनी नौकरशाही से नाराज नहीं हैं। इसलिए मेला अधिकारी कुंभ मेला प्रयागराज विजयकरण आनंद ने स्वच्छ कुंभ-2019 प्रयागराज पर प्रस्तुतिकरण किया तो उन्हें सराहना मिली। डीएम ललितपुर मानवेन्द्र सिंह ने गोवंश आश्रय स्थलों के निर्माण, अभिषेक सिंह ने परीक्षाओं में भ्रष्टाचार रोकने तथा सुशील तुले ने पुलिस विभाग में ट्वीटर सेवा पर प्रस्तुतिकरण से सराहना प्राप्त की। मुख्यमंत्री को चुनाव बाद की बच्चियों के साथ जघन्य घटनाएं कटोच गयीं। उन्होंने कहा डीएम और एसपी जनता के लिए पूरी ईमानदारी से जुट जाएं। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी ने पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को यह जताना शुरू कर दिया कि वे बंद गाड़ी में बैठकर गुजरने वाले नेता नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ में संगम तट पर साढ़े चार करोड़ लोगों ने स्नान किया, कहीं गंदगी नहीं हुई मगर आप अपने जिले के किसी गांव में चले जाएं, जहां मुश्किल से 100-50 लोग ही रहते हैं, वहां हर जगह गंदगी मिलेगी। नालियां ओवरफ्लो मिलेंगी/ सफाईकर्मी हैं मगर गांवों मंे सफाई नहीं होती। शहरों में भी यही स्थिति है।

पहली बात तो यह कि सफाई होती ही नहीं और अगर सफाईकर्मियों ने कृपा करके सफाई कर भी दी तो कूड़ा जगह-जगह इकट्ठा करके छोड़ देंगे। कई-कई दिनों तक वो कूड़ा नहीं उठाया जाता। सीएम योगी ने जिलाधिकारियों की तरफ इंगित करके कहा कि उस रास्ते से आप लोग भी गुजरते होंगे क्या आपने फोन करके पूछा कि यहां गंदगी क्यों है? उन्होंने कहा कि क्या ये आपका कर्तव्य नहीं है?

इस प्रकार की व्यावहारिक समस्या का खाका मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की बैठक में खींचा तो अफसर आश्चर्यचकित रह गये। गांवों और शहरांे में छुट्टा पशुओं की समस्या को भी मुख्यमंत्री अच्छी तरह से समझते हैं। मुख्यमंत्री ने एण्टी भूमाफिया के बारे में याद दिलायी। उन्होंने कहा कि मैंने इसे बनाया लेकिन यह अब निष्क्रिय है। निराश्रित गोवंश सड़कों और खेतों में घूम रहा है। छुट्टा जानवर लोगों को मार रहे हैं। हम भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड और स्थानीय निकायों से मिलकर कोई व्यवस्था क्यों नहीं बना सकते।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने पालिथीन प्रतिबंधित करने को कहा था। शासन का आदेश (जीओ) भी जारी हुआ मगर पालिथीन का इस्तेमाल आज भी हो रहा है। कूड़े में पालिथीन है, थर्माकोल हैं अदालत से प्रतिबंध लगा है लेकिन हम इनके खिलाफ अभियान नहीं चला पा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने गांवों के तालाब कुम्हारों को उपलब्ध कराने को कहा था लेकिन कई जिलाधिकारियों ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं ली। प्रदेश के गोवंश के दुरूपयोग की शिकायतें अब भी प्रतिदिन मिलती है। हमने जून 2018 में कहा था कि निराश्रित गोवंश के लिए अन्यत्र स्थल बनाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने हमीरपुर जनपद की तरीफ की और कहा कि वहां छोड़ अन्य किसी जिले में गोवंश की समुचित व्यवस्था नहीं हो पायी। इसलिए गोवंश से किसान भी परेशान हैं।

उनकी फसल को छुट्टा पशु बर्बाद कर रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने पुलिस अफसरों को भी बताया कि वे हर व्यक्ति की समस्या को समझते हैं। योगी ने कहा कि वर्दी की धमक का अहसास अपराधियों को कराइए जनता को नहीं।

श्री योगी को पुलिस की कर्तव्य की याद इसीलिए दिलानी पड़ी क्योंकि हाल ही में बच्चियों के साथ जघन्य अपराधों के मामले सामने आये हैं। इन मामलों को लेकर समाजवादी पार्टी और बसपा ने संयुक्त रूप से प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है।

बसपा प्रमुख मायावती ने हालांकि प्रदेश में होने वाले विधानसभा के 12 उपचुनावों को लेकर सपा से किनारा कर लिया है लेकिन सरकार को घेरने में साथ ही खड़ी है।

उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की पहली महिला अध्यक्ष दरवेश यादव की 12 जून को आगरा सिविल कोर्ट में गोली मार कर हत्या पर मायावती और अखिलेश यादव ने कानून व्यवस्था को लेकर सवाल खड़ा किया है। योगी ने पुलिस को 180 मामले ऐसे गिनवाये हैं जिनमें अपराधियों को कड़ी सजा दिलाने की अपेक्षा की गयी है। (हिफी)

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