दैवीय आपदा के मानकों में छूट मिले : सीएम त्रिवेंद्र रावत

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने दैवीय आपदा से हुए नुकसान के आकलन को आई केंद्रीय टीम के सामने राज्य की दुश्वारियां रखीं। सीएम ने कहा कि पहाड़ों के लिए दैवीय आपदा के मानकों में छूट दी जानी चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों का दुख दूर किया जा सके। साथ ही उन्होंने मुआवजा बढ़ाने का भी सुझाव दिया।  गृह मंत्रालय की एक टीम उत्तराखंड में आपदा से हुए नुकसान का जायजा लेने आई हुई है। संयुक्त सचिव एसके जिंदल के नेतृत्व में यह टीम आपदा प्रभावित उत्तरकाशी व चमोली का दौरा करके शुक्रवार को दून पहुंची। टीम ने देर शाम सीएम आवास में मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इस दौरान सीएम ने कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र के सहयोग से सड़क, बिजली और पेयजल योजनाओं का पुनर्निर्माण के साथ ही पीड़ितों को हरसंभव मदद देने का प्रयास किया है। इसके बावजूद आपदा से हुए नुकसान की व्यापकता को देखते हुए आधारभूत सुविधाओं की पुनस्र्थापना के लिए और अधिक सहायता की आवश्यकता है।
संयुक्त सचिव जिंदल ने सीएम को बताया कि टीम ने प्रभावित जिलों का दौरा कर आपदा से नुकसान के आकलन के साथ ही इससे जुड़ी सूचनाएं जुटा ली हैं। अब जल्द ही यह रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी जाएगी। आकलन टीम में केंद्रीय आकलन टीम में व्यय विभाग वित्त मंत्रालय के निदेशक थागलेमिलन,  कृषि सहकारिता एवं कृषक कल्याण के निदेशक विपुल कुमार श्रीवास्तव, जल शक्ति मंत्रालय केन्द्रीय जल आयोग के अधीक्षण अभियंता सुधीर कुमार, सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के मुख्य अभियंता वीरेंद्र कुमार खेड़ा, ग्रामीण विकास मंत्रालय के निदेशक चन्द्रशेखर और ऊर्जा मंत्रालय के निदेशक सुनील जैन शामिल थे।

जल्द बनेंगे ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन
इससे पहले टीम ने सचिवालय में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह के साथ ही अन्य उच्चाधिकारियों से आपदा से हुए नुकसान पर चर्चा की। इस दौरान आपदा प्रबंधन सचिव अमित नेगी ने बताया, आपदा से निपटने को आपदा प्रबंधन विभाग, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स, आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केन्द्र, राज्य एवं जिला आपातकालीन परिचालन केन्द्रों की स्थापना की गई है। साथ ही ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन एवं भूकंप के लिए अर्ली वॉर्निंग सिस्टम भी लगाए जा रहे हैं। उन्होंने टीम को बताया कि सरकार सामुदायिक स्वयंसेवकों को भी प्रशिक्षण दे रही है। 

22195 लाख रुपये के नुकसान का आकलन
बैठक के दौरान आपदा प्रबंधन के प्रभारी सचिव एस.मुरुगेशन ने केंद्रीय दल को बताया कि 2019 के मानसून सत्र में अब तक कुल 59 लोगों की जान जा चुकी है। जबकि 57 लोग घायल हैं और चार लापता हैं। प्रदेश में आपदा से 92 बड़े और 319 छोटे पशुओं की मौत हुई है। मुरुगेशन के अनुसार, लोक निर्माण विभाग में अब तक लगभग 15354.15 लाख रुपये, पेयजल में करीब 2096.21 लाख रुपये, सिंचाई में तकरीबन 2248.54 लाख और ऊर्जा में लगभग 545.08 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है। उक्त समेत राज्य को कुल करीब 22195.03 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है। इसमें 12117.67 लाख रुपये का नुकसान एसडीआरएफ के अन्तर्गत स्वीकार्य है लेकिन 10077.36 लाख का नुकसान एसडीआरएफ के अन्तर्गत कवर नहीं होगा। 

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