जनप्रतिनिधि पंचायती राज एक्ट के विरोध में उतरे

जनप्रतिनिधियों ने पंचायती राज एक्ट के विरोध में एक बैठक आयोजित की। जिला मुख्यालय में उन्होंने मांग पूरी नहीं होने पर ढोल नगाड़ों के साथ धरना प्रदर्शन करने की चेतावनी दी। मंगलवार को दंडी क्षेत्र आश्रम में जनप्रतिनिधियों की बैठक हुई। जिसमें उन्होंने पंचायती राज एक्ट संशोधन विधेयक पर आपति दर्ज की। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार द्वारा एक जन विरोधी अध्यादेश जारी किया है। जिसमें दो बच्चों से अधिक वाले तथा शैक्षिक योग्यता की पाबंदी लगा दी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत में संविधान के अंर्तगत ऐसा कोई कानून नहीं है। जबकि सांसदों तथा विधायकों के लिए ऐसा कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं है। एक देश में एक ही कानून होना चाहिए न कि पंचायत प्रतिनिधियों के लिये अलग और कानून बनाने वालों के लिए कोई कानून नहीं है। नगर पालिका एवं नगर निकायों में कट ऑफ डेट 2003 रखी गई हैं। तो पंचायतों में क्यों नहीं साथ ही जब पंचयत चुनाव पुरानी नियमावली के अनुसार करवाये जा रहे हैं तो सिर्फ दो बिंदुओं पर ही क्यों संशोधन किया गया। जबकि पंचायती एक्ट वर्ष 2016 में बनाया गया तो 2016 को ही कट ऑफ डेट रखी जाय। जिससे जनसंख्या नियंत्रण भी होगी और पंचायत चुनाव लड़ने से वंचित किये गये उनको भी मौका मिलेगा। उन्होंने शीघ्र ही पंचायती राज एक्ट संशोधन नहीं हटा तो जनप्रतिनिधियों द्वारा सड़क पर आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

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