अब यूपी का निवासी बनेगा चम्पावत के नदेड़ा गावं का ग्राम प्रधान

इस बार चम्पावत जिले में बाराकोट ब्लॉक के नदेड़ा गांव में उत्तर प्रदेश मूल के एससी-एसटी वर्ग के व्यक्ति का प्रधान बनना तय माना जा रहा है। सामान्य जाति बाहुल्य नदेड़ा गांव में इस बार ग्राम प्रधान की सीट एससी-एसटी वर्ग के लिए आरक्षित हुई है। नदेड़ा गांव का एक भी व्यक्ति इस श्रेणी में नहीं आता है। लिहाजा, बर्दाखान के राजकीय इंटर कॉलेज में नौकरी कर रहे यूपी के कर्मचारियों के परिजन या रिटायर हो चुके यूपी मूल के कर्मचारियों में से किसी को प्रधान बनाना पड़ सकता है। हालांकि, गांव के मूल निवासी इसका विरोध कर रहे हैं। वो आपत्ति भी दर्ज करा चुके हैं। नदेड़ा गांव भनार, नदेड़ा और फठल्ती तोक से बना है। इस ग्राम पंचायत में जोशी, बगौली, पुनेठा, खर्कवाल यानी सभी लोग ब्राह्मण हैं। मतदाताओं की तादाद भी करीब छह सौ 49 है।

करीब 11 मतदाता यूपी से

इस गांव में करीब 11 मतदाता यूपी के पीलीभीत और बहराइच जिलों के मूल निवासी हैं, जो बर्दाखान इंटर कॉलेज में नौकरी करते हैं। कुछ कर्मी किराये के मकान में परिवार सहित भी रहते हैं। कुछ लोहाघाट से रोजाना आना-जाना करते हैं। पिछले चुनाव में इस गांव में प्रधान पद महिला आरक्षित था। इस गांव के मूल निवासी मोहन चंद्र जोशी, उमेश जोशी, राजेश जोशी और राजेंद्र पुनेठा के मुताबिक, इससे पहले कभी नदेड़ा में एससी-एसटी के लिए प्रधान सीट आरक्षित नहीं थी। इस बार उम्मीद थी कि यह सीट सामान्य होगी, जिस पर कोई पुरुष दावेदारी करेगा। मगर जब आरक्षण सूची जारी हुई तो प्रधान सीट एससी-एसटी के लिए आरक्षित होने से सभी हैरत में पड़ गए। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उनके साथ नाइंसाफी की गई है। जब गांव में एक भी एससी-एसटी वर्ग का व्यक्ति नहीं है, तो प्रधान सीट आरक्षित करने का औचित्य नहीं है। उन्होंने पंचायतीराज कार्यालय में आपत्ति भी दर्ज करवाई, मगर वहां भी ग्रामीणों की समस्या का समाधान नहीं हो सका।

कुछ ग्रामीण चुनाव के बहिष्कार का ऐलान 
नदेड़ा गांव के स्थानीय ग्रामीण दोटूक कह रहे हैं कि वह बाहरी राज्य के व्यक्ति को गांव का प्रधान किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेंगे। उनका यह भी कहना है कि जो सरकारी कर्मचारी अभी यहां हैं, तबादले पर वो परिवार समेत कहीं और चले जाएंगे। इसलिए उनके परिजन कैसे गांव का विकास कर पाएंगे? यदि कोई रिटायर कर्मचारी प्रधान बनता है तो छोटे-मोटे काम के लिए यूपी की दौड़ लगानी पड़ेगी। लिहाजा, स्थानीय ग्रामीणों ने इस सीट से आरक्षण नहीं हटाने की स्थिति में चुनाव बहिष्कार की चेतावनी भी दी है।

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