नगर निगम शहर की गलियों में नहीं दस दिन झांकेगा

शहर में सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहा नगर निगम आजकल वीवीआइपी डयूटी में व्यस्त है। निगम के अधिकारी 28 जुलाई तक मसूरी में होने जा रहे हिमालयी सम्मेलन में व्यस्त हैं। शिकायतकर्ताओं को भी 28 जुलाई के बाद आने को कहा जा रहा। 

ऐसे में उनके पास वाहन उपलब्ध है न ही कर्मचारी। नीलकंठ विहार में इन दिनों आवारा पशुओं के कारण गंदगी फैली हुई है। गलियों में गोबर की गंदगी है और पैदल चलना मुश्किल हो रहा। सफाई का कार्य तक नहीं हो रहा। इस पर लोगों ने नगर निगम में पहुंच पशु चिकित्साधिकारी को शिकायत की थी कि उनकी कालोनी में आवारा पशु परेशानी का सबब बन रहे हैं। ये कॉलोनी में गंदगी कर रहे हैं और इनकी वजह से आएदिन दुर्घटना हो रही। आरोप है कि पशु चिकित्साधिकारी विवेकानंद सती ने लोगों को टका सा जवाब दे दिया। कहा कि अभी पशु पकडऩे वाली गाड़ी व कर्मी उन रूटों पर लगाई गई है जहां से हिमालयी सम्मेलन में भाग लेने के लिए दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्री आ रहे हैं। 28 जुलाई के बाद ही वाहन व कर्मी उपलब्ध हो पाएंगे। उनके इस जवाब के बाद लोगों के पास लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। 

यह अकेले नीलकंठ विहार की समस्या नहीं बल्कि शहर के 100 वार्डों के हर गली मोहल्ले की समस्या है। शहर में सर्वाधिक शिकायत कूड़ा उठान को लेकर है। गाडिय़ां एक-एक हफ्ते तक वार्डों में नहीं जा रही हैं एवं आमजन शिकायतें करते हुए परेशान हो चुका है। निगम अधिकारी सामान्य दिनों में आमजन की नहीं सुनते, तो इस समय कैसे सुनेंगे। क्योंकि, वे इन दिनों वीवीआइपी की ‘सेवा’ में व्यस्त हैं।

शहर में डेंगू का डंक पांव पसार चुका है लेकिन नगर निगम की फॉगिंग का इस बार कुछ अता-पता नहीं। हालात ये हैं कि एक भी वार्ड में फॉगिंग नहीं कराई जा रही। हर वार्ड में गलियों में गंदगी व पानी जमा है व डेंगू के प्रबल आसार बने हुए, लेकिन नगर निगम को इसकी भी परवाह नहीं।

विनोद चमोली (विधायक धर्मपुर एवं पूर्व महापौर) का कहना है कि हिमालयी सम्मेलन बड़ा कार्यक्रम है। इसमें सफाई व्यवस्था के लिए जितने भी कर्मचारी लगाए जाने हैं, वे आउट-सोर्स किए जा सकते थे। वार्डों से कर्मियों को हटाना गलत है, वो भी बरसात के समय, जब डेंगू का खतरा बना हुआ है। हमारे समय में ऐसे अनगिनत कार्यक्रम हुए पर हमने वार्डों से कर्मी नहीं हटाए। आयोजन के लिए अलग से कर्मी हॉयर किए।

दावे रोड स्वीपिंग मशीन लाने के हो रहे, जबकि आमजन के घर के बाहर से रोजाना कूड़ा तक नहीं उठ रहा है। कहने को हम स्वच्छ दून-सुंदर दून में सांस ले रहे हैं।

 

 

 

 

 

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