इमरान खान के साथ बैठक में जम्मू-कश्मीर को लेकर सामने आई चीन की ‘मंशा’

11 अक्टूबर को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत के दौरे पर आने वाले हैं लेकिन इसी बीच जम्मू-कश्मीर पर दिया उनका एक एक बयान पर भारत को नागवार गुजरा है. भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है, ‘भारत के आंतरिक मामलों पर किसी अन्य देश को टिप्पणी करने का कोई हक नहीं है.


चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से बुधवार को कहा कि कश्मीर में स्थिति पर चीन ‘करीबी नजर रखे हुए’ है और ‘यह बात स्पष्ट’ है. साथ ही, उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘संबंद्ध पक्ष’ शांतिपूर्ण वार्ता के जरिए इस मामले को सुलझा सकते हैं. चीनी राष्ट्रपति ने इमरान खान को बैठक के दौरान भरोसा दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय हालात में बदलावों के बावजूद चीन और पाकिस्तान के बीच मित्रता अटूट तथा चट्टान की तरह मजबूत है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने शी और खान के बीच बातचीत की रिपोर्ट पर बुधवार को कहा, “हमने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के बीच बैठक के संबंध में रिपोर्ट देखी, जिसमें उन्होंने अपनी बातचीत के दौरान कश्मीर का भी उल्लेख किया है.”


कुमार ने कहा, “भारत का पक्ष अटल बना हुआ है और स्पष्ट है कि जम्मू एवं कश्मीर भारत का आंतरिक मुद्दा है. चीन हमारे पक्ष से अच्छी तरह वाकिफ है. भारत के आंतरिक मामलों पर किसी अन्य देश को टिप्पणी करने का कोई हक नहीं है.”


रवीश कुमार ने कहा, ‘यह पूरी तरह से भारत का आंतरिक और संप्रभु मामला है और भारतीय संविधान से जुड़ा हुआ है. किसी भी अन्य देश को इससे कुछ लेना-देना नहीं है.


11-12 अक्टूबर को होने वाले शी-मोदी (Xi Jinping- PM Modi) की बातचीत में कश्मीर और अनुच्छेद 370 का मामला शामिल नहीं है और अगर शी मामले में और ज्यादा जानना चाहेंगे तो उन्हें इसकी विस्तृत जानकारी दी जाएगी.
आपको बता दें कि इमरान खान और शी के बीच वार्ता के बाद बुधवार को जारी संयुक्त बयान में एक पूरा पैरा कश्मीर मुद्दे को लेकर था.
बयान के अनुसार, “पाकिस्तानी पक्ष ने चीनी पक्ष को जम्मू एवं कश्मीर की स्थिति से अवगत कराया, जिसमें उसकी चिंताओं और मौजूदा मुद्दे शामिल हैं.


चीनी पक्ष ने इसपर कहा कि वह जम्मू एवं कश्मीर के मौजूदा हालात पर ध्यान दे रहा है और दोहराते हुए कहा कि कश्मीर मुद्दा इतिहास द्वारा पैदा किया गया विवाद है और इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव और द्विपक्षीय समझौते से संबंधित संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के आधार पर शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाना चाहिए.”

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