गैर पहाड़ियों को भी लगी गढ़वाली और कुमाऊंनी सीखने की चाहात

दिल्ली एनसीआर मेें करीब 30 जगहों पर चलाई जा रहीं ग्रीश्मकालीन गढ़वाली क्जासेज में इस बार बड़ी संख्या में गैर उत्तराखंडी के लोग भी पहुंच रहे है। इनमें बच्चों के अलावा 40 से ऊपर की उम्र के लोग भी हैं, जिनका पहाड़ से संपर्क टूटा हुआ है। वे भी इन क्लासेज में आकार अपने जुड़ाव को मजबूत कर रहे हैं। उत्तराखण्ड की लोकसभा 3 साल से साहित्य मंच और डीपीएमआई के अध्यक्ष व समाजसेवी विनोद बछेती गढ़वाली- कुमाऊंनी क्लासेज लगा रहे है।विनोद बछेती ने बताया कि गैर उत्तराखंडी जिनमें बिहार,पंजाब और यूपी के लोग भी बड़ी संख्या में है। वे भी हमारी क्जासेज में नई भाशा सीखने के लिए आ रहे हैं। नोएडा के 22 सेक्टर मे क्लासेज चलाई जा रही है। द्वारका सेक्टर में पहली बार गढ़वाली- कुमाऊंनी क्जासेज चला रहे है देवभूमि समग्र विकास संगठन के महासचिव प्रीतम पांडे ने कहा कि हमारे यहां पंजाबी वयस्क और मूल रूप से बिहार के रहने वाले बच्चे भी पढ़ने आ रहे हैं। विनोद बछेती ने बताया कि पहली और पहली और दूसरी बार मे बच्चों में हिचक दिखती है, मगर उसके बाद वे खेल जाते है।वे घर जाकर भी पैरंट्स से इस बारे में सवाल-जवाब करते हैं जिससे घर में भी गढ़वाली-कुमाऊंनी का चलन बढ़ने की उम्मीद है।

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