फैटी लिवर हो सकती है गंभीर बीमारी

लिवर हमारे शरीर का दूसरा सबसे बड़ा अंग है और सबसे जरूरी भी। खाने-पीने की क्रिया से संबंधित इसके अनेक काम तो हैं ही, यह हमारे रक्त से कई प्रकार के हानिकारक पदार्थों को भी बाहर निकालता है। लेकिन जब लिवर की कार्यक्षमता बिगड़ती है, तो स्वास्थ्य सीधा प्रभावित होता है। इस समस्या को शुरुआत में फैटी लिवर की समस्या कहते हैं। जानकारी देता आलेख

लिवर खून में प्रोटीन और वसा की सिंथेसिस के साथ-साथ ग्लूकोज की सिंथेसिस के लिए भी जिम्मेदार है। एक सामान्य लिवर में क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को नई कोशिकाओं द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है, क्योंकि लिवर की कोशिकाएं पुनर्जनन क्रिया में सक्षम होती हैं। लेकिन जब चोट पुरानी होती है, तो लिवर खुद को पूरी तरह से ठीक नहीं कर पाता है और इन परिस्थितियों में स्कार ऊतक सामान्य लिवर ऊतक की जगह ले लेता है। इस स्थिति को सिरोसिस कहा जाता है। इसका अर्थ है कि लिवर को स्थायी नुकसान पहुंचा है। इस प्रकार सिरोसिस विकसित होने से पहले लिवर रोग के लिए एक उचित उपचार करना बहुत आवश्यक है।

फैटी लिवर के लक्षण
कई बार फैटी लिवर से जुड़े लक्षणों को दिखाई देने में कई साल लग सकते हैं। हालांकि लिवर में अधिक वसा होने से इसमें सूजन आ सकती है और नीचे की तरह कुछ लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
इन लक्षणों पर रखें नजर 
थकान
भूख न लगना
कमजोरी’   मतली
   ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होना
   लिवर का आकार बढ़ना
  पेट दर्द

जब समस्या बढ़ जाती है
एक बार लिवर की बीमारी सिरोसिस या लिवर फेल्योर तक पहुंच जाती है, तो व्यक्ति में लक्षण बदल जाते हैं। ऐसे लोगों में दिखने वाले लक्षण इस प्रकार होते हैं-
  पैरों में सूजन
   पेट सूजना (पेट में तरल पदार्थ का भरा होना)
   त्वचा और आंखों में पीलापन
   खून की उल्टी
   भ्रम, चेतना का नुकसान।
  अधिक आसानी से खून बहने की प्रवृत्ति

फैटी लिवर के कारण 
फैटी लिवर का सबसे आम कारण शराब पीना है। इसका मतलब यह नहीं कि जो लोग शराब नहीं पीते, उन्हें यह बीमारी बिल्कुल भी नहीं छू सकती। दरअसल, फैटी लिवर तब विकसित होता है, जब शरीर बहुत अधिक वसा बनाता है या उसकी जरूरी मात्रा की खपत नहीं कर पाता। यदि ऐसा होता है, तो अतिरिक्त वसा लिवर कोशिकाओं में जमा हो जाती है और व्यक्ति को नॉन-एल्कोहलिक फैटी लिवर रोग (एनएएफएलडी) हो जाता है।

फैटी लिवर का इलाज
शराब से प्रेरित फैटी लिवर रोग के लिए केवल एक विश्वसनीय उपचार है, पूरी तरह से शराब छोड़ना। यदि लिवर खराब होने के बावजूद रोगी शराब पीता रहे, तो इस स्थिति में कोई भी दवा काम नहीं करती। एनएएफएलडी को अगर जल्दी जान लिया जाए, तो इस बीमारी के जोखिम कारकों को नियंत्रित करके पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है।

 खून में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखें।
शुगर और सैचुरेटेड फैटी एसिड का सेवन जितना अधिक संभव हो, कम करें।
वजन कम रखें।
ब्लड शुगर को नियंत्रित करें।
नियमित व्यायाम करें।
ताजे फल और सब्जियों का सेवन करें।
रेड मीट के स्थान पर खाने में चिकन या मछली को प्राथमिकता दें।


एक बार सिरोसिस सेट हो जाने के बाद कोई प्रभावी उपचार नहीं होता है। इसलिए सिरोसिस की शुरुआत से पहले फैटी लिवर का निदान और उपचार बहुत महत्वपूर्ण है। फैटी लिवर वाले प्रत्येक रोगी को लिवर रोग के कारण और सीमा का आंकलन करने के लिए एक पूरी तरह जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। पेट का एक सरल अल्ट्रासाउंड आसानी से फैटी लिवर की होने की पुष्टि कर सकता है।


फैटी लिवर से बचने के लिए सभी को कुछ वर्षों में एक बार एक नियमित अल्ट्रासाउंड स्र्कैंनग से गुजरना चाहिए। जिन लोगों को फैटी लिवर होने का निदान किया जाता है, उनमें सिरोसिस विकसित होने से पहले समस्या को ठीक करने के लिए लिवर विशेषज्ञ द्वारा उचित मूल्यांकन से गुजरना चाहिए। लक्षणों को नजरअंदाज करना बड़ी मुसीबत में डाल सकता है। इसलिए किसी भी तरह का लक्षण दिखने पर समय पर डॉक्टर से जांच कराना और उनके निर्देशानुसार पूरा उपचार करना जरूरी हो जाता है। इसे पूरी गंभीरता से लेना चाहिए।

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